Jaunpur : बुजुर्गों व माता-पिता की सेवा करना पूण्य का कार्य, मिलती है खुशी: समाजसेवी प्रदीप यादव

न्यूज़ अब तक आपके साथ
देश प्रदेश का सबसे बड़ा न्यूज़ नेटवर्क बनाने का सतत प्रयास जारी।

यूपी के खुटहन (जौनपुर) में 29 नवंबर को कपसियां गांव में समाज सेवी प्रदीप यादव (पुर्व अध्यक्ष क्षेत्र पंचायत सघं) ने तीन सौ जरूरत मंदो को कंबल,थैला वितरण किया। जिसे पाकर उनके चेहरे खिल उठे।
युवा समाजसेवी प्रदीप यादव ने कहा कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गांव के गरीब व जरूरतमंदों में कंबल/वस्त्र वितरित कर लोगों का आशीर्वाद मिल रहा है। मेरे जीवन का यह सुखद पल है की गरीबों में कंबल वितरण कर लोगों का आशीर्वाद मुझ और मेरे परिवार वालों को मिल रहा है। मानव सेवा से बढ़कर कोई कर्म नहीं है। ऐसे में कंबल का वितरण कर मुझे सुखद अनुभूति का एहसास हो रहा है। सभी लोग गरीबों असहायों को कंबल वितरण कराने का कार्य करें।

निर्बल और असहायों की सेवा साक्षात ईश्वर की पूजा है। दान कई प्रकार के है। लेकिन मौसम और आवश्यकता के अनुरूप किया गया दान सर्वोत्तम होता है। क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड के चलते इस समय कंबल और गर्म कपड़ों का वितरण करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। हम आपस में मिलजुल कर तथा एक दूसरे के सहयोग से ही गरीबो को विकास की मुख्य धारा तक ला सकते हैं। कार्यक्रम का आयोजन राज कुमार यादव ने गरीबों को धूप में बिठाकर चाय पानी का नाश्ता कराते हुए आने वाले बुजुर्ग माता-पिता का आभार व्यक्त किये।

इस मौके पर रामदवर यादव (पूर्व बी.डी.सी.) रामलवट(माले) महाबाली मिश्रा,शिव कुमार यादव, गाव के अनीता, गुड़िया, संगीता, सुदामा, चंद्रावती, सरिता, हीरावती, संजू, मालती, प्रेमा, सुनीता, सीमा, सावित्री, सुंदरा, रेखा, नैनुनिशा, अमनुनिशा, मदीना, जेबुन्निसा, सलीम, सलमा, सोनी, रेशमा, रुखसाना, रेहाना, जमालुद्दीन, लहीसुन, सरीता, कुमारी, विमला, उर्मिला, शांति, चतुरा, मालती, जड़ावती, उषा, शीला, क्रांति, मनका, हसीना, चंद्रकला, अखिलेश, रामकेश, बदामा, दुर्गावती, रीता, विमला, मनराजजी, शीला, सुदामा, मर्यादि, पुष्पा, रामअकबाल, सूरसती, जन्नती, अशरफी, सुशीला, शांताराम, अमला, मंजू, शीला, प्रेमा, बदामा, चमेला, गीता, मन्नू,सुशीला, प्रभुदेई, वर्षा आदि।



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

न्यूज़ अब तक

Jaunpur : भाई ने पहले बेंत से गला दबाई फिर कर दिया आग के हवाले, कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास और अर्थदंड की सज़ा।