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रिपोर्ट – लक्ष्मण कुमार चौधरी | न्यूज़ अब तक आपके साथ
जौनपुर। जनपद की जिला कारागार में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। मृतक को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
● जाने क्या है पूरा मामला-
1. चोरी का मुकदमा दर्ज-
सरपतहां थाना क्षेत्र के महमूदपुर गांव निवासी बनवारी गौतम के छोटे बेटे अजीत गौतम पर पड़ोसी गांव राजधरपुर निवासी कमल कुमार ने चोरी का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। आरोप था कि अजीत ने घर में घुसकर लाल लहंगा, काला घाघरा, पांच हजार रुपये नकद, जेवरात और पर्स चोरी किया।
2. पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी-
मुकदमा दर्ज होने के बाद 19 फरवरी को पुलिस ने अजीत गौतम को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया।
3. बरामदगी को लेकर उठा सवाल-
मामले में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। आरोप काले घाघरे की चोरी का था, लेकिन पुलिस के प्रेस नोट में काले लहंगे की बरामदगी दर्शाई गई। इस विरोधाभास को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
4. पिता का गंभीर आरोप-
मृतक के पिता बनवारी गौतम का आरोप है कि पुलिस 15 फरवरी की रात करीब 3 बजे उनके बेटे को घर से उठा ले गई थी। उनका कहना है कि थाने में अजीत ने बताया था कि पुलिस ने उसकी बुरी तरह से पिटाई की और नहर के किनारे ले जाकर फर्जी तरीके से जेब में जेवर रखकर जबरन उसका वीडियो बनाया।
5. रिश्वत मांगने का भी आरोप-
पिता ने यह भी आरोप लगाया कि बेटे को बुरी तरह से मारा और उसे छोड़ने के एवज में पुलिस ने कथित तौर पर एक लाख रुपये की मांग की, रकम इतनी बड़ी थी कि मैं दे न सका, रकम न देने पर 19 फरवरी को मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया।
6. जेल में बिगड़ी तबीयत और मौत-
परिजनों के अनुसार, जेल भेजे जाने के अगले ही दिन यानी 20 फरवरी को अजीत की तबीयत बिगड़ गई और रात करीब 9 बजे उसकी मौत की सूचना परिवार को दी गई।
7. परिवार में मचा कोहराम-
अजीत दो भाइयों में छोटा था। बड़ा भाई दिव्यांग बताया जा रहा है। अजीत अपने पिता के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया अब परिवार का भरण पोषण कैसे होगा एक बेटा दिव्यांग है और दूसरे की मौत अब हो चुकी है।
8. पोस्टमार्टम और पुलिस की चुप्पी-
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के लगभग 24 घंटे बाद भी जौनपुर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
9. निष्पक्ष जांच की मांग-
विचाराधीन कैदी की मौत के बाद परिजन निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे है,साथ ही यह भी सुनिश्चित कि जाय कि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेर फेर न कर सके।
(नोट: खबर परिजनों के आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक जांच के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे।)
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जौनपुर न्यूज़
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