रिपोर्ट- नेहा पटेल मछलीशहर जौनपुर
मछलीशहर। नगर क्षेत्र में शुक्रवार को प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है।
घटना के बाद अवैध अस्पतालों की जांच के लिए निकली टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और अस्पतालों को बंद करा दिया है। अस्पताल संचालकों द्वारा वैधता संबंधी जरूरी कागजात (पंजीकरण प्रपत्र) न दिखाए जाने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. अजय सिंह ने इन अस्पतालों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
अस्पतालों की औचक जांच के लिए निकली स्वास्थ्य विभाग की टीम शुक्रवार देर रात नगर के बरईपार रोड स्थित मीरा पॉलीक्लीनिक एवं बालाजी पॉलीक्लीनिक तथा प्रयागराज रोड स्थित कमला हॉस्पिटल पहुंची। छापे के दौरान मौके पर मौजूद अस्पताल स्टाफ और संचालक अस्पताल के संचालन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि अस्पताल संचालकों ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो दिन की मोहलत मांगी है। फिलहाल उनके अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाते हुए ताला बंद कर दिया गया है। यदि दो दिन के भीतर वैध प्रपत्र नहीं दिखाए गए, तो उनके खिलाफ आगे की कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई के कारण लंबे समय से अवैध अस्पतालों का जाल फैला हुआ है, यह जाल चाय की टापरी से कम नही है जिससे आए दिन मासूमों और मरीजों की जान पर बन आती है। हालांकि, अब विभाग ने अभियान चलाकर पिछले पांच महीनों में करीब 10 अवैध अस्पतालों को बंद कराया है।
इसी क्रम में बीते बुधवार को भी जिले में 8 अवैध अस्पतालों को सील किया गया था और अब शुक्रवार रात मछलीशहर कस्बा स्थित तीन और अस्पतालों को बंद कराकर बड़ी कार्रवाई की गई है।
● क्या था पूरा मामला क्यों हुई कार्यवाही-
विदित हो कि प्रयागराज-जौनपुर मार्ग पर चुंगी चौराहे के समीप स्थित जीवन रक्षा हॉस्पिटल में शुक्रवार 29 मई को प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने बच्चे की मौत के लिए डॉक्टरों को जिम्मेदार मानते हुए हंगामा शुरू कर दिया। घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ मौके से भाग गए। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया है।
नगर के अस्पताल में प्रसव के दौरान एक दिन के अंतराल पर होने वाली मौत की यह दूसरी घटना है। सुजानगंज क्षेत्र के बेरमाव निवासी विनोद पटेल ने बताया कि शुक्रवार की सुबह 7 बजे वह अपनी ससुराल टटेहरा गांव से गर्भवती पत्नी अंजू (26) को लेकर मिर्जापुर नहर के पास रहने वाली नर्स पुष्पा के पास पहुंचे।
पुष्पा ने बच्चा उल्टा होने की बात कही और उन्हें लेकर जीवन रक्षा हॉस्पिटल पहुंची। अस्पताल पहुंचने के बाद ऑपरेशन के लिए सर्जन नहीं मिलने पर सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया। गर्भस्थ शिशु उल्टा होने के कारण प्रसव के दौरान उसकी मौत हो गई।
विवाह के छह वर्ष बाद गर्भ में आए शिशु की मौत होने के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और हंगामा करने लगे। घटना की सूचना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल को सील कर दिया और मामले की जांच में जुट गई है।
स्थानीय लोगों का कहना था कि क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों की नियमित जांच न होने से आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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