रिपोर्ट- लक्ष्मण कुमार चौधरी
खुटहन, जौनपुर। खुटहन ब्लॉक परिसर में साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों और फरियादियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ब्लॉक परिसर के विभिन्न हिस्सों में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में अपने काम से ब्लॉक कार्यालय पहुंचने वाले ग्रामीणों और फरियादियों को गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खंड विकास अधिकारी नीरज जायसवाल के कार्यभार संभालने के बाद से ब्लॉक परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि यहां आने वाले आम नागरिकों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
वहीं, ब्लॉक परिसर में लाखों रुपये की लागत से लगाया गया शीतल जल प्लांट भी सवालों के घेरे में है।
लोगों के मुताबिक, ग्रामीणों और फरियादियों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह प्लांट लगाया गया था, लेकिन लंबे समय से इसका उपयोग नहीं हो रहा है। भीषण गर्मी के बीच दूर-दराज के इलाकों से अपने काम के लिए ब्लॉक कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब सरकारी धन खर्च कर आम जनता की सुविधा के लिए शीतल जल प्लांट लगाया गया है, तो उसका नियमित संचालन क्यों नहीं हो रहा है? आखिर लाखों रुपये की लागत से तैयार की गई यह सुविधा लोगों के काम कब आएगी?
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ ब्लॉक परिसर में जगह-जगह गंदगी दिखाई दे रही है, तो दूसरी तरफ लोगों को पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में ब्लॉक परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ब्लॉक परिसर में नियमित साफ-सफाई कराई जाए, जगह-जगह पड़े कूड़े का तत्काल निस्तारण कराया जाए और बंद पड़े शीतल जल प्लांट को जल्द से जल्द चालू कराया जाए।
लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों को स्वच्छ वातावरण और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। खासकर गर्मी के मौसम में पेयजल की व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि खुटहन ब्लॉक परिसर की साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारी कब तक प्रभावी कदम उठाते हैं और लाखों रुपये की लागत से लगाए गए शीतल जल प्लांट का लाभ आम जनता को आखिर कब मिल पाता है।
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