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UP दारोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल पर छिड़ी बहस, विशेषज्ञों ने कहा– शिक्षा में संवेदनशीलता जरूरी


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लखनऊ/उत्तर प्रदेश।
हाल ही में आयोजित यूपी दारोगा भर्ती परीक्षा में हिंदी व्याकरण से जुड़ा एक प्रश्न इन दिनों सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चर्चा का विषय बन गया है। यह प्रश्न “वाक्यांश के लिए एक शब्द” से संबंधित था, जिसमें अभ्यर्थियों से पूछा गया था — “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” के लिए सही एक शब्द का चयन करें।

इस प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए थे — पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी। हिंदी व्याकरण के अनुसार इस वाक्यांश का सही उत्तर “अवसरवादी” माना जाता है, क्योंकि अवसरवादी उस व्यक्ति को कहा जाता है जो परिस्थितियों या अपने लाभ के अनुसार अपना रुख या विचार बदल लेता है।

परीक्षा के बाद यह प्रश्न सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। कई अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे सामान्य व्याकरण का प्रश्न बताया, वहीं कुछ लोगों ने विकल्पों में “पंडित” शब्द शामिल किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न और विकल्प तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि कोई भी शब्द किसी विशेष समुदाय या वर्ग से जुड़ा हुआ न लगे, ताकि अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का मुख्य उद्देश्य केवल अभ्यर्थियों के ज्ञान और समझ का मूल्यांकन करना होता है। इसलिए प्रश्नों का चयन करते समय भाषा और विषयवस्तु की शुद्धता के साथ-साथ सामाजिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी प्रश्न को लेकर समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करने के बजाय उसे शैक्षिक दृष्टिकोण से समझना अधिक उचित है। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं समाज को जागरूक और सक्षम बनाने का माध्यम हैं, इसलिए सभी पक्षों को संयम और सकारात्मक सोच के साथ इस प्रकार के विषयों को देखना चाहिए।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और सार्वजनिक चर्चाओं में आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। जब हम किसी विषय पर विचार करते हैं तो उसका उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना और समाज में सकारात्मक माहौल बनाए रखना होना चाहिए।

— रिपोर्ट - लक्ष्मण कुमार चौधरी



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